लुधियाना से गिल रोड स्थित दाना मंडी में लगे मेला जनता की सुरक्षा दांव पर बिना फिटनेस के चल रहे हैं झूलों

लुधियाना में (विक्रम सैनी) मेला
को देखने के लिए हर दिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं।मेला में लगे झूलों का आनंद लेने में लोग पीछे नहीं है, लेकिन मेले में में चल रहे झूलों में से एक भी झूले का फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है। ऐसे में हजारों लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। खास बात यह है कि इस लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।नियम अनुसार किसी भी स्थान पर लगने वाले मेले के लिए महत्वपूर्ण होता है, कि आयोजक मेले में लगने वाले सभी झूलों का फिटनेस कराएं। नियम अनुसार आयोजक को झूलों का फिटनेस कराने के लिए पीडब्ल्यूडी को आवेदन देती है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी से इंजीनियर एक-एक झूले की जांच करके फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है, लेकिन दाना मंडी गिल रोड स्थित मेले में अब तक झूलों का फिटनेस नहीं कराया।खास बात यह है कि प्रशासन के जिम्मेदारों को यह तक भी पता नहीं है कि फिटनेस किससे कराया जाता है। बीमा भी नहीं कराया झूलों के संचालन के लिए आयोजक को शासन के एक और नियम का पालन करना होता है। जिसमें मेले की अवधि में सभी झूलों में बैठने वाले प्रत्येक व्यक्ति की बीमा कराया जाता है। इस की प्रिमियम की राशि झूले के संचालक को जमा करना होती है,लेकिन मेला में आज तक बीमा नहीं कराया गया है।गिने चुने स्थानों पर लगे हैं छोटे-बड़े झूले के संचालकों से पता चला कि किसी के पास भी फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं था। संचालकों ने बताया अन्य स्थानों पर लगने वाले मेले में झूला लगाने के पहले फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा होता है, लेकिन यहां पर आज तक कभी न तो फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाया गया और न ही कभी बीमा कराया।सुरक्षा का ध्यान नहीं रखती हैं झूला लगाने वाली कंपनियां सूत्रों का कहना है कि लुधियाना में दो जगह जो मेले लगे हैं लेकिन इनके लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं किए जाते हैं। प्रशासन से अनुमति नहीं ली जाती है। न ही सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया जाता है जिस कारण कभी भी अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है।अक्सर नियमों में होता हैं बदलाव
मोहाली में 50 फुट की ऊंचाई का झूला 4 सितंबर को गिर गया था। इसमें एक दर्जन से लोग घायल हो गए थे। इस घटनाक्रम के बाद पूरे देश में झूला के नियमों में परिवर्तन किया गया था। बताते हैं कि झूला गिरने की घटना के बाद अब प्रशासन इस संबंधी पहले से तय शर्तों में कुछ बदलाव किया था।इसके मुताबिक अब अस्थाई झूले आदि को कोई मंजूरी नहीं जाएगा। मेले में लगने वाले झूलों आदि को पहले सारे नियम पूरे करने होंगे और सभी विभागों से एनसीओ लेनी होगी। इसके साथ ही जब तक मेला चलेगा, तब तक उसकी जांच की प्रक्रिया होगी मगर पीडब्ल्यूडी ने झूला लगाने की एनओसी तो दे दी, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की जांच नहीं की है। बिना अनुमति के संचालित अवैध मेला शासन-प्रशासन को चुनौती दे रहा है। एवं अन्य विभागों की बिना अनुमति के संचालक मनमानी से मेले को संचालित किए हुए हैं।
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